Monday, July 26, 2021
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पढ़ाई के दौरान ही करनी पड़ी 50 रुपये की मजदूरी, अथक प्रयास से बन गए आर्मी ऑफिसर : प्रेरणा

किसी भी व्यक्ति के सफलता के पीछे किसी न किसी के मार्गदर्शन का अहम रोल होता है। कई बार लोग सही मार्गदर्शन के वजह से अपने जिंदगी में वो मुकाम हासिल करते हैं, जिसकी वे कभी कल्पना भी नहीं किए रहते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है बलबंका तिवारी की, जिन्होंने अपने चाचा के दिखाए राह पर चलकर अपनी मेहनत से सफलता के शिखर तक पहुंचे हैं।

भारतीय सैन्य अकादमी तक का साफ़र आसान नहीं था

स्नैक फैक्ट्री में 50 रुपये की कमाई करने वाले बलबंका तिवारी (Balbanka Tiwari) के लिए भारतीय सैन्य अकादमी तक का सफ़र आसान नहीं था। उन्होंने 325 अन्य भारतीय जेंटलमैन कैंडेटों के साथ पासिंग आउट परेड में भाग लेने के बाद अपनी तीन महीने की बेटी से पहली बार मुलाकात की। आरा (Aara) के सुन्दरपुर बरजा गांव के निवासी बलबंका तिवारी ने कहा कि इस दिन को देखने के लिए उन्होंने बहुत कठिन संघर्ष किया है।

Balbanka tiwari from aara became a lieutenant in the indian army.

आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पढ़ाई के दौरान करने लगे 50 रुपये की नौकरी

उनके पिता एक किसान हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से बलबंका ने स्कूली शिक्षा के दौरान ही काम करना शुरु कर दिया। वह बताते हैं कि वर्ष 2008 में दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद काम की तलाश में उड़ीसा (Odisha) के राउरकेला चले गए, जहां उन्होंने कुछ महिनों तक एक लोहे की फिटिंग की फैक्ट्री में काम किया। उसके बाद वे एक स्नैक फैक्ट्री में काम करते लगे, जहां उन्हें प्रतिदिन 50 रुपये की कमाई होती थी। हाईस्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद वे ट्यूशन शिक्षक के रूप में काम करने लगे और परिवार की मदद के लिए पैसे भेजने लगे।

Balbanka tiwari from aara became a lieutenant in the indian army.

चाचा से मिली सेना भर्ती रैली की जानकारी

बलबंका तिवारी (Balbanka Tiwari) ने स्नातक की पढ़ाई के लिए एक स्थानीय कॉलेज में दाखिला ले लिया। इसी दौरान उनके चाचा ने उन्हें बिहार (Bihar) में अपने घर के पास दानापुर क्षेत्र में एक सेना भर्ती रैली की जानकारी दी। 28 वर्षीय बलबंका कहते हैं कि उनके चाचा सेना में एक सिपाही के तौर पर नियुक्त हैं, इसलिए वह भी अपने देश की सेवा करने के साथ ही प्रतिष्ठित आजीविका चलाने के लिए सेना में भर्ती होना चाहते थे।

Balbanka tiwari from aara became a lieutenant in the indian army.

मेहनत से दूसरे प्रयास में हुए सफल

बलबंका तिवारी अपनी मेहनत और लगन से दूसरे प्रयास में सफल होकर सेना में सिपाही के रूप में शामिल हो गए। उनकी पहली पोस्टिंग वर्ष 2012 में भोपाल (Bhopa) में सेना के EAME सेंटर में हुई। इसी दौरान बलबंका को सिपाही से अधिकारी के पद पर पदोन्नति होने के लिए आर्मी कैडेट कॉलेज के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने इसकी परीक्षा पास की और वर्ष 2017 में IMA (Indian Military Academy) में एसीसी में शामिल हो गए। वहीं से बलबंका तिवारी ने एक सैन्य अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया।

Balbanka tiwari from aara became a lieutenant in the indian army.

जीवन का सबसे यादगार पल

उन्होंने ने बताया कि यह दिन उनके जीवन का यादगार दिन बन गया, क्योंकि उसी दिन उन्होंने पहली बार अपनी 3 माह की बेटी को देखा था। उन्होंने कहा कि वे रेजीमेंट में शामिल होने से पहले अपनी बेटी के साथ समय व्यतीत करेंगे। Balbanka tiwari from aara

परिवार में खुशी का माहौल

इस खुशी के अवसर पर उनकी पत्नी रुचि और उनकी मां पहुंची थीं। रुचि कहती हैं कि उनके पति बलबंका ने इस दिन को देखने के लिए काफी संघर्ष किया। उनका सपना पूरा होते देख मैं बेहद प्रसन्न हूं और मुझे विश्वास है कि वे सच्चे मन से देश की सेवा करेंगे और देश को गौरवान्वित करेंगे। -Balbanka tiwari from aara became a lieutenant in the indian army

Shikha Singh
Shikha is a multi dimensional personality. She is currently pursuing her BCA degree. She wants to bring unheard stories of social heroes in front of the world through her articles.

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