Tuesday, May 11, 2021
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देशभक्ति: बिहार का वह गांव जहां के 27 स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए।

जब बात देश की आती है तो लोग अपनी जान तक की परवाह नहीं करते। भारत में देशभक्ति के एक से बढकर एक उदाहरण हैं उसी क्रम में बिहार के सिवान जिले में एक ऐसा गांव बंगरा हैं जिस गांव में 27 स्वतंत्रता सेनानी पैदा हुए और अपने जीवन को देशभक्ति में समर्पित कर दिया। आज के इस पेशकश में बात उन स्वतंत्रता सेनानियों की…

बंगरा महाराजगंज से सटा गांव है। इस गांव के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। इस गांव के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपने आप को कुर्बान कर दिया तो कई ने अंग्रेजों की प्रताड़ना के बावजूद अपना सिर नीचा तक नहीं किया। अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले अमर शहीद देवशरण सिंह अंग्रेजों के गोली का शिकार हो गए।

idols of freedom fighters

बंगरा गांव के वे 27 स्वतंत्रता सेनानी देवशरण सिंह, रामलखन सिंह, टुकड़ सिंह, गजाधर सिंह, रामधन राम, रमप्रीत सिंह, सुंदर सिंह, रामपरिक्षण सिंह, शालीग्राम सिंह, गोरखा सिंह, फेंकू सिंह, जुठन सिंह, काली सिंह, सूर्यदेव सिंह, बामबहादुर सिंह, राजनारायण उपाध्याय, रामइकबाल सिंह, तिलकेश्वर सिंह, देवपूजन सिंह, रघुवीर सिंह, नागेश्वर सिंह, शिवकुमार सिंह, झूलन सिंह, राजाराम सिंह, सीताराम सिंह, मुंशी सिंह, और सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लोहा लिया। गोरख सिंह, सीताराम सिंह और राजाराम सिंह अंग्रेजों के हथ्थे नहीं चढ़े और जब अंग्रेज इन तीनों स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार नहीं कर सके तो वे तीनों स्वतंत्रता सेनानियों का घर जला दिया। फिर भी इन स्वतंत्रता सेनानियों के देश भक्ति में कोई कमी नहीं आई। ये लोग अपने देश के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई करते रहे।

अंग्रेजी हुकूमत का विरोध जब महाराजगंज से शुरू हुआ, तो वहां के नौजवान की टोली का नेतृत्व उमाशंकर प्रसाद ने किया। 1942 में उमाशंकर प्रसाद ने नमक बनाओ आंदोलन, सत्याग्रह में बढ-चढ कर भाग लिया। अपने स्कूल के बच्चों को अंग्रेज के खिलाफ शिक्षा देने के कारण अंग्रेजी हुकूमत ने उमाशंकर प्रसाद जी को देखते ही गोली मार देने का आदेश जारी कर दिया था। इस आदेश के जारी होने के बाद उमाशंकर प्रसाद भूमिगत हो गए। उमाशंकर प्रसाद भूमिगत होने के बावजूद भी आंदोलन में लगे लोगों की आर्थिक सहायता देने शुरू कर दिए। 1928 में जब महात्मा गांधी महाराजगंज पहुंचे तो उमाशंकर प्रसाद जी ने महात्मा गांधी जी को 1001 रुपए की थैली दिए। जिससे देश को आजाद कराने में रुपए की कमी नहीं आए। अंग्रेज सैनिकों ने उमाशंकर प्रसाद के इस राष्ट्र प्रेम को देखकर उनके स्कूल में आग लगा दी और उनकी दुकान भी लूट लिए।

bharat choro aandolan

आज भी उन 27 स्वतंत्रता सेनानियों में से 3 स्वतंत्रता सेनानी सीताराम सिंह, मुंशी सिंह, और सुरेन्द्र प्रसाद जीवित हैं। ये जब अंग्रेजों के जुल्मों की कहानियां सुनाते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बंगरा गांव का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

Rajnikant Jha
Rajnikant Jha is a graduate lad from Bihar. He is looking forward to understand difficulties in rural part of India. Through Logically , he brings out positive stories of rural India and tries to gain attention of people towards 70% unnoticed population of country.

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