Tuesday, May 11, 2021
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दो दोस्तों ने अच्छी खासी नौकरी छोड़कर शुरू की खेती, लाखों के मुनाफे के साथ दे रहे लोगों को रोजगार।

दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी एक अलग पहचान बनाते है। जहाँ लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए , नौकरी की तलाश में देश-विदेश भटकते रहते हैं। वहीं कुछ पढ़े-लिखें लोग अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ खेती करने की सोच रखते हैं। जी हाँ ऐसे हीं सोच रखने वाले दो युवक धीरेंद्र और आदित्य हैं जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़ खेती करने को सोचा। जिनसे वे लाखों की कमाई के साथ-साथ किसानों को रोजगार भी दे रहे हैं।

धीरेंद्र और आदित्य दोनों की दोस्ती बहुत पुरानी है लेकिन इन्होंने अपने बिजनेस की शुरुआत दो साल पहले की। धीरेंद्र ने बताया की उन्होंने मैनेजमेंट और लॉ की पढ़ाई की है। वे अपने बिजनेस शुरू करने से पहले मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते थे। वही आदित्य ने अपनी पढ़ाई माइक्रोबायोलॉजी से की है और वे एक एनआरआई हैं। दोनों का कहना है कि हमारा मकसद केवल पैसा कामना नहीं बल्कि कमाई के साथ-साथ लोगों को खेती के लिए आत्मनिर्भर बनाना है। इन दोनों का ये भी कहना है कि जब ये लोग पहली बार खेती की शुरुआत की तो उसी वर्ष इन्होंने लाखों का मुनाफा हुआ और खास बात यह है कि इससे लोगों को रोजगार भी मिलने लगा।

dhirendar tiwari
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बिहार के सिवान जिले के रहने वाले धीरेंद्र और आदित्य जिन्होंने पूरे देश के युवाओं के लिए एक मिशाल क़ायम की है। आज के दौर में जहाँ लोग अच्छी नौकरी के लिए अपनी गांव को छोड़ दूसरे शहरों में भटक रहे है। वही इन दोनों ने अपने गांव में ही खेती करके लाखों की कमाई कर रहे हैं और किसानों को रोजगार भी दे रहे हैं। धीरेंद्र बताते है कि वे अपनी नौकरी छोड़ बिजनेस करने को सोच रहे थे तभी अचानक उनके दिमाग़ में खेती करने का आइडिया आया। वे अपने इस आइडिया के बारे में अपने दोस्त आदित्य को बताया जिसमें आदित्य ने भी इनका साथ दिया। फिर दोनों ने मिलकर बिहार सरकार के एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी से खुद को रजिस्टर कराया और अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया।

aditya
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धीरेंद्र जो पिपरा गांव से है और ये कहते है की हमारा मकसद गांव के लोगों को खेती के लिए आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने ये भी बताया कि पहले ही वर्ष हमें लाखों का मुनाफा हुआ और हम इसमें कामयाब भी हो रहे हैं!  धीरेंद्र ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में हमें ATMA से जुड़े आर.के.मंडल, केके चौधरी के अलवा हॉर्टीरीकल्चर डिपार्टमेंट के पीके मिश्रा और आरपी प्रसाद का सहयोग भी मिल रहा है। इन्होंने बताया कि अब ये मशरूम की भी खेती कर रहे हैं जिससे इन्हें उम्मीद है कि इन्हें लाखों की कमाई होगी।

धीरेंद्र ने अपने भविष्य की प्लानिंग बताते हुए कहा कि उनकी योजना फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की है। जिसके जरिये मशरूम से बनने वाले फूड प्रोजेक्ट को तैयार किया जायेगा। उन्होंने ये भी बताया की किसानों को भी इसमें सम्मिलित करके उन्हें ज्यादा से ज्यादा रोजगार मुहैया कराया जाएगा। वे कहते है कि हमारे देश में लोगों को खेती से जो भरोसा उठ चुका है उसे फिर से वापस लाना भी हमारी योजना का एक हिस्सा है।

farming

धीरेंद्र और उनके दोस्त आदित्य ने जिस तरह से अपनी अच्छी नौकरी छोड़कर खेती का रूख किया और अपनी मेहनत और सूझबूझ से ना सिर्फ पैसे कमा रहे बल्कि अपने प्रयास से कई लोगों को रोजगार भी दे रहे ! दोनों दोस्तों ने अपने सराहनीय कार्य से कई लोगों को प्रेरित भी किया है !

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