Tuesday, May 11, 2021
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एक गरीब किसान के बेटे ने अपनी काबिलियत से खङी कर दी देश की अग्रणी दवा कम्पनी “एल्केम”

दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते है, जिनकी कहानी हमें अपने सपनों को पूरा करने की ताकत देती है। एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जिन्होंने एक छोटे शहर से निकलकर दुनिया में अपना परचम लहराया। एक ऐसे इंसान जिनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उनका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था लेकिन ग़रीबी और अच्छी व्यवस्था नहीं मिलने के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। कहते है कि सपने जब टूटते हैं तो इंसान टूट जाता है, लेकिन इस व्यक्ति ने अपने विश्वास और लगन को कभी कम नहीं होने दिया। आज हम एक ऐसे व्यक्ति के बारे जानेंगे जिन्होंने एक छोटी सी शुरुआत से देश के बड़े उद्योगपति के रूप सामने आये।

सम्प्रदा सिंह की सफलता की कहानी आज भी लोगों के लिए एक प्रेरणा है। इनका जन्म बिहार के जहानाबाद जिले के मोदनगंज प्रखंड के ओकरी गांव में हुआ था। इनके पिता एक किसान थे। इनका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था। इनकी घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी फिर भी इनके पिता ने इन्हें तैयारी के लिए पटना भेजा। इन्होंने भी मेहनत और लगन से तैयारियां की लेकिन इन्हें प्रवेश परीक्षा में सफलता नहीं मिल पाई। वे बहुत दुःखी हुए। जिसके बाद वे रोजगार की तलाश में निकल पड़े। रोजगार के लिए साल 1953 में पटना में उन्होंने एक छोटी सी दवा की दुकान से शुरआत की। एक छोटी सी शुरुआत कर उन्होंने अपने मेहनत और मिलनसारिता से कुछ ही वर्षो में अच्छी कमाई करने लगे। उसके बाद साल 1960 में उन्होंने अपने करोबार को विस्तार से चलाने के लिए मगध फार्मा नाम से एक फार्मास्युटिकल्स डिस्ट्रिब्यूशन फर्म की शुरुआत की और बहुत ही जल्द वह कई बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर बन गए।

alkem labs

कहते है कि मनुष्य जितना ऊंचा सोचता है उतनी बड़ी उसकी कहानी बनती है। कुछ ऐसी ही सोच रखने वाले थे सम्प्रदा सिंह उनका कहना था कि अगर हम इतनी छोटी सी शुरुआत से एक सफल डिस्ट्रीब्यूशन फर्म बना सकते है तो फिर क्यों ना हम अपनी ही फार्मा ब्रांड बाजार में लाए और फिर उन्होंने एक दवा निर्माता बनने का संकल्प लेकर वे मुंबई चले गए। मुंबई जाकर साल 1973 में उन्होंने एल्केम लेबोरेटरीज नाम से खुद की दवा बनाने वाली एक कंपनी खोली। पर शुरुआत में कम पैसे होने के वजह से पांच साल तक उन्हें संघर्ष करना पड़ा। फिर उनके जीवन में एक नई उम्मीद जगी जब एल्केम लैब ने एक एंटी बायोटिक कम्फोटेक्सिम का जेनेरिक वर्जन टैक्सिम बनाने में सफलता हासिल की।

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वास्तव में इसकी इन्वेंटर कम्पनी मेरिओन रुसेल ने एल्केम को बहुत छोटा प्रतिस्पर्धी मानकर गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन फ्रेंच बहुराष्ट्रीय कम्पनी से यह सबसे बड़ी गलती हुई और किफायती मूल्य के कारण टैक्सिम ने मार्केट में वर्चस्व क़ायम कर लिया। इस वर्चस्व से फार्मा क्षेत्र में लेबोरेटरीज को एक नई पहचान मिली।

30 देशों में अपने कारोबार का विस्तार करते हुए आज विश्व के फार्मा सेक्टर में इसकी पहचान है। एल्केम लेबोरेटरीज आज फार्मास्युटिकल्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स बनाती है। साल 2017 में फोर्ब्स इंडिया ने 100 टॉप भारतीय करोड़पतियो में इन्होंने 52वां स्थान प्रदान किया था और 2.8 बिलियन डॉलर हासिल करने वाले पहले बिहारी उद्यमी बने।

samprada singh

सम्प्रदा सिंह की मृत्यु 2019 में हुई। वे तो दुनियां से अलविदा कह गए लेकिन उनकी सफलता भरी कहानी जो देश के सभी लोगों के लिये आज भी प्रेरणादायक हैं। फिलहाल में इस कम्पनी को उनके भाई और बेटा संभालते हैं और आज भी इस कंपनी से करोड़ो की कमाई होती हैं।

सम्प्रदा सिंह की ये कहानी हमें बताती है कि हालात चाहे जैसा भी हो हमें अपनी दृढ़-इच्छाशक्ति और मजबूत इरादों को कभी मरने नहीं देना चाहिए और अपने हालतों से लड़ना चाहिए। एक न एक दिन हमें सफलता जरूर मिलेगी।

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