Wednesday, September 22, 2021
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पिता को कलेक्टर के हस्ताक्षर हेतु दर-दर की ठोकरें खाते देख बेटी ने लिया संकल्प, खुद बन गई IAS अधिकारी : IAS रोहिणी

प्रत्येक आदमी के जीवन में कभी न कभी उतार-चढ़ाव आता ही रहता है। ऐसा कहा जाता है कि अच्छे और बुरे दिन जिंदगी की अहम हिस्सा है। आज हम बात करेंगे, महाराष्ट्र (Maharastra) के एक किसान के बेटी की, जिसने अपने पिता के बुरे वक्त को परखते हुए एक संकल्प लिया कि वे एक न एक दिन कलेक्टर (IAS) जरूर बनेगी। उस लड़की ने अपने मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद बिना कोचिंग क्लासेज के आईएएस की तैयारी करना शुरू की। वे अपने इस संकल्प के साथ आज आईएएस बनकर अपने और अपने पूरे समाज का नाम रौशन करने का काम किया है।

success story of becoming an ias officer rohini

कौन है वह लड़की?

हम बात कर रहे हैं आईएएस रोहिणी (IAS Rohini ) की, जो मूल रूप से महाराष्ट्र (Maharastra) की रहने वाली है। उनके पिता पेशे से एक किसान है। रोहणी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी विद्यालय से की है, उसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत के बदौलत सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन ली। इंजीनियरिंग पुरी होने के बाद वो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में लगी। वे पढ़ाई में बहुत तेज-तरार और मेहनती थी। उनकी मेहनत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि, उन्होंने बिना किसी कोचिंग क्लास के ही अपने दम पर IAS की परीक्षा पास की।

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कैसे आया आईएएस बनने का विचार

बहुत साल पहले महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में एक किसान सरकारी दफ्तर के नीचे से लेकर ऊपर तक अपने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने के लिए दौड़-धूप कर रहा था। तब उस किसान की बेटी ने उनसे इस परेशानी का कारण पूछा। साथ ही साथ उसने अपने पिता से यह भी पूछा कि आम आदमी की परेशानी खत्म हो ये सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होती है? इसके बाद किसान पिता ने अपनी बेटी को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, यह जिम्मेदारी जिला कलेक्टर (DM) की है। तभी से उस बच्ची के दिमाग में यह बात बैठ गई की ‘ मैं बड़ी होकर आमजन के सेवा के लिए अपने मेहनत के बदौलत एक न एक दिन आईएएस बनूँगी’। यह घटना तब की है जब रोहिणी 9 साल की थी। रोहिणी ने बाल अवस्था में तो संकल्प कर लिया। उसके बाद उन्होंने अपने पढ़ाई के दम पर अपनी मंजिल तथा संकल्प पुरा की।

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पिता ने बढ़ाया मनोबल

अपने पिता के साथ सरकारी आॅफिस मे जरूरी कागजात पर हस्ताक्षर कराने के लिए हुई परेशानी के कारण रोहिणी ने अपने पिता को ये बताया की वो कलेक्टर बनना चाहती है। इसके बाद उनके पिता ने उन्हें प्रोत्साहित किया और साथ ही साथ ये सलाह भी दिया कि जब भी वो कलेक्टर बन जाएं तो जरूरतमंदो की सेवा करे, उनकी परेशनी दूर करने में उनकी मदद करे। क्योंकि उनके पिता को इस बात का अंदाजा अच्छे से था की सरकारी दफ्तरों में किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए आम आदमी को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अपने पिता के बातों का अनुसरण करते हुए रोहिणी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है और वह आम जनों के सहुलियत का पुरा ध्यान रखती हैं।

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ईमानदारी के साथ कर रही है लोगों की सेवा

रोहिणी (IAS Rohini ) की पहली पोस्टिंग वर्ष 2008 में तमिलनाडु (Tamilnadu) के मधुरई (Madhurai) में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर हुई। इसके बाद वह तिंदिवनम में सब कलेक्टर बनी। मधुरई में रोहिणी ने ऐसे-ऐसे काम किए कि लोग आज तक तारीफ करते नहीं थकते। उनके प्रयास से ही यह जिला राज्य का पहला खुले में शौच से मुक्त जिला बना था। रोहिणी ने इलाके में न सिर्फ शौचालय बनवाएं, बल्कि ये सुनिश्चित किया कि लोग इनका प्रयोग करें। साल 2016 में उन्हें MNREGA को बेहतर तरीके से इंप्लीमेंट करने के लिए अवार्ड दिया गया। रोहिणी के पिता ने उनको आईएएस अधिकारी बनने के बाद यह बताया कि “तुम्हारे टेबल पर ढेर सारी फाइलें आएंगी लेकिन तुम उन्हें सामान्य कागज की तरह मत लेना। तुम्हारे एक साइन से लाखों लोगों की जिंदगी में सुधार आ सकता है। हमेशा ये सोचना कि लोगों के लिए अच्छा क्या है।” अपने पिता की बातों को ध्यान में रखते हुए रोहिणी अपने काम को बहुत निष्ठा से निर्वहन करती है और वे अपने भविष्य को निरंतर जन सेवा के लिए ही समर्पित करने की भावना के साथ काम करती हैं। वे युवाओं और खास करके महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनी हुई है।

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‘Bihar Connection’ आईएएस रोहिणी (IAS Rohini) को कलेक्टर बनने की बधाई देता है और साथ ही अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाने के लिए उनके जज्बे को सलाम करता है, और दुआ करता है कि वो ऐसे ही तन-मन से देश की सेवा करें और ऐसे ही जीवन मे आगे बढ़ें तथा अपने मुकाम को पाते रहें।

News Desk
राजनैतिक परिवेश से उठकर, हम बिहार के गौरवगाथा को लिखते हैं।

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