Tuesday, May 11, 2021
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कई ऐतिहासिक धरोहरों का गवाह है बिहार का वैशाली प्रान्त। जानिए वैशाली के गरिमामयी इतिहास को।

बिहार प्रान्त का वैशाली जिला भी एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में जाना जाता है। 12 अक्टूबर 1972 को मुजफ्फरपुर से अलग होकर वैशाली जिला बना जिसका मुख्यालय हाजीपुर बनाया गया। यहाँ की मुख्य भाषा वज्जिका है।ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार यहाँ विश्व का सबसे पहला गणतंत्र कायम किया गया था। भगवान बुद्ध का इस धरती पर तीन बार आगमन हुआ, यह उनकी कर्म भूमि भी है।अतिमहत्वपूर्ण बौद्ध एवं जैन स्थल होने के अलावा यह स्थान पौराणिक हिन्दू तीर्थ एवं पाटलिपुत्र जैसे ऐतिहासिक स्थल के निकट है। आज वैशाली पर्यटकों के लिए बहुत लोकप्रिय स्थान है।

वैशाली का इतिहास:-

वैशाली का नामकरण महाभारत काल के एक राजा ईक्ष्वाकु वंशीय राजा के नाम पर रखा गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार विष्णु पुराण में इस क्षेत्र पर राज करने वाले 34 राजाओं का उल्लेख है। इस राजवंश में 24 राजा हुए। राजा सुमति अयोध्या नरेश भगवान राम के पिता राजा दशरथ के समकालीन थे। ईसा पूर्व सातवीं सदी के उत्तरी और मध्य भारत में विकसित हुए 16 महाजनपदों में वैशाली का स्थान अति महत्त्वपूर्ण था। नेपाल की तराई से लेकर गंगा के बीच फैली भूमि पर वज्जियों तथा लिच्‍छवियों के संघ द्वारा गणतांत्रिक शासन व्यवस्था आरंभ की गयी थी। लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में यहाँ का शासक जनता की प्रतिनिधियों द्वारा चुना जाने लगा और गणतंत्र की स्थापना हुई। यह विश्‍व को सर्वप्रथम गणतंत्र का ज्ञान करानेवाला स्‍थान है। प्राचीन वैशाली नगर अति समृद्ध एवं सुरक्षित नगर था जो एक-दूसरे से कुछ अन्तर पर बनी हुई तीन दीवारों से घिरा था ताकि शत्रु के लिए नगर के भीतर पहुँचना असम्भव हो सके।

चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार पूरे नगर का घेरा 14 मील के लगभग था। मौर्य एवं गुप्‍त राजवंश में जब पाटलीपुत्र राजधानी के रूप में विकसित हुआ, तब वैशाली इस क्षेत्र में होने वाले व्‍यापार और उद्योग का प्रमुख केन्द्र था। भगवान बुद्ध ने वैशाली के समीप कोल्‍हुआ में अपना अन्तिम सम्बोधन दिया था। जिसकी याद में महान मौर्य सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी यानी ईसा पूर्व में सिंह स्‍तम्भ का निर्माण करवाया था। महात्‍मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के लगभग 100 वर्ष बाद वैशाली में दूसरे बौद्ध परिषद् का आयोजन किया गया था। इस आयोजन की याद में दो बौद्ध स्‍तूप बनवाये गये।

Vishv shanti Stupa
बौद्ध स्‍तूप

वैशाली के समीप ही एक विशाल बौद्ध मठ है, जिसमें महात्‍मा बुद्ध उपदेश दिया करते थे। भगवान बुद्ध के सबसे प्रिय शिष्य आनंद की पवित्र अस्थियाँ हाजीपुर के पास एक स्तूप में रखी गयी थी। वैशाली को महान भारतीय दरबारी आम्रपाली की भूमि के रूप में भी जाना जाता है, जो कई लोक कथाओं के साथ-साथ बौद्ध साहित्य में भी दिखाई देती है। जैन धर्मावलम्बियों के लिए वैशाली काफी महत्त्‍वपूर्ण है ! वज्जिकुल में जन्में भगवान महावीर यहाँ 22 वर्ष की उम्र तक रहे थे। इस तरह वैशाली हिन्दू धर्म के साथ-साथ भारत के दो अन्य महत्त्वपूर्ण धर्मों का केन्द्र हैं। बौद्ध तथा जैन धर्मों के अनुयायियों के अलावा ऐतिहासिक पर्यटन में दिलचस्‍पी रखने वाले लोगों के लिए भी वैशाली महत्त्‍वपूर्ण है। वैशाली की भूमि न केवल ऐतिहासिक रूप से समृद्ध है परन्तु कला और संस्‍कृति के दृष्टिकोण से भी काफी धनी है।

स्वतंत्रता आन्दोलन के समय वैशाली के शहीदों की अग्रणी भूमिका रही है। बसावन सिंह, बेचन शर्मा, अक्षयवट राय, सीताराम सिंह, बैकण्ठ शुक्ला, योगेन्द्र शुक्ला जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में महत्त्वपूर्ण हिस्सा लिया था। आजादी की लड़ाई के दौरान 1920, 1925 तथा 1934 में महात्मा गाँधी का वैशाली में आगमन हुआ था। वैशाली की नगरवधू आचार्य चतुरसेन के द्वारा लिखी गयी एक रचना है जिसका फिल्मांतरण भी हुआ, जिसमें अजातशत्रु की भूमिका अभिनेता श्री सुनील दत्त द्वारा निभायी गयी है।

Vaishali, Bihar
Vaishali, Bihar

वैशाली के दर्शनीय स्थल:-

• अशोक स्‍तम्भ
• बौद्ध स्‍तूप
• अभिषेक पुष्‍करणी
• विश्व शान्ति पैगोडा
• बावन पोखर मंदिर
• राजा विशाल का गढ़

यहाँ कैसे पहुँचे:-

सड़क मार्ग

वैशाली पहुंचने के लिए पटना, हाजीपुर अथवा मुजफ्फरपुर से सड़क मार्ग सबसे उपयुक्‍त है। वाहनों की उपलब्धता सीमित है इसलिए पर्यटक हाजीपुर या मुजफ्फरपुर से निजी वाहन भाड़े पर लेकर भ्रमण कर सकते हैं। यहाँ से पटना समेत उत्तरी बिहार के सभी प्रमुख शहरों के लिए बसें जाती है।

रेल मार्ग

वैशाली का नजदीकी रेलवे जंक्शन हाजीपुर है जो पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय भी है। यह जंक्शन वैशाली से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर है। दिल्‍ली, मुम्बई, चेन्‍नई, कोलकाता, गुवाहाटी तथा अमृतसर के अतिरिक्त भारत के महत्त्वपूर्ण शहरों के लिए यहाँ से सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध है।

हवाई मार्ग

वैशाली का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा राज्य की राजधानी पटना में स्थित है। जय प्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र के लिए इंडियन, स्पाइस, जेट, किंगफ़िशर, जेटएयरवेज आदि हवाई सेवाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ आनेवाले पर्यटक दिल्‍ली, कोलकाता,काठमांडू, बागडोगरा, राँची, बनारस और लखनऊ से फ्लाइट ले सकते हैं। हवाई अड्डे से हाजीपुर होते हुए निजी अथवा सार्वजनिक वाहन से वैशाली तक जाया जा सकता है।

भ्रमण का समय:-

वैशाली भ्रमण के लिए सालोंभर जाया जा सकता है किन्तु सितम्बर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त होता है। ये अपने हस्‍तशिल्‍प के लिए विख्‍यात है। कार्तिक के महीने में लगने वाले एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला सोनपुर मेले से यादगार के तौर पर हस्तशिल्‍प का सामान खरीदा जा सकता है। प्रसिद्ध मधुबनी कला की पेंटिंग भी खरीदी जा सकती है।

वैशाली बिहार राज्य का ऐतिहासिक स्थल है जहां प्राचीन व विश्व प्रसिद्ध धरोहर है। वैशाली बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।

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